गेहूं की फसल की सफलतापूर्वक वृद्धि और उच्च उत्पादन के लिए, सही समय पर फर्टिलाइज़र का प्रबंधन जरूरी है। गेहूं की फसल को सबसे ज्यादा नाइट्रोजन (यूरिया) की आवश्यकता होती है, जो इसकी शाखाओं की वृद्धि में सहायक है। इसके बाद फॉस्फोरस और थोड़ी मात्रा में पोटाश की भी आवश्यकता होती है। इस आवश्यकता के अनुसार, फर्टिलाइज़र को दो महत्वपूर्ण चरणों में दिया जाना चाहिए: बुआई के समय (बेसल डोज़) और इसके बाद वृद्धि के चरण में (टॉप ड्रेसिंग)।
बुआई के समय फर्टिलाइज़र डालना बेहद महत्वपूर्ण है। जब फर्टिलाइज़र बुआई के समय दिए जाते हैं, तो यह फसल को जल्दी उपलब्ध होते हैं, जिससे जड़ों की वृद्धि बेहतर होती है। इस चरण में, किसान कंपाउंड फर्टिलाइज़र्स जैसे 10:26:26, 12:32:16, या 15:15:15 का उपयोग कर सकते हैं। प्रत्येक एकड़ के लिए एक से डेढ़ बैग इन फर्टिलाइज़र्स का उपयोग उचित रहेगा। फॉस्फोरस की मात्रा को बढ़ाने के लिए, ट्रिपल सुपर फॉस्फेट (TSP) का भी प्रयोग किया जाना चाहिए, क्योंकि इसमें फॉस्फोरस की अधिकता होती है।
अच्छी पैदावार की प्राप्ति के लिए, बुआई के समय प्रति एकड़ कम से कम 100 किलोग्राम फर्टिलाइज़र डालना आवश्यक है। हालांकि, यदि मिट्टी की उर्वरता अधिक है या गोबर की खाद का प्रयोग किया गया है, तो 70 से 75 किलोग्राम भी पर्याप्त हो सकता है।
फर्टिलाइज़र प्रबंधन का दूसरा चरण आमतौर पर उस समय होता है जब गेहूं की फसल 25 से 30 दिन की हो जाती है। यह समय निराई और अगली सिंचाई के बाद का होता है। निराई के कारण फसल पर होने वाले तनाव को कम करने और गेहूं की वृद्धि को फिर से प्रारंभ करने के लिए इस चरण में फर्टिलाइज़र का उपयोग जरूरी है।
दूसरी डोज़ के लिए, प्रति एकड़ एक बैग यूरिया का प्रयोग करना चाहिए। यदि आपकी गेहूं की फसल में पीलेपन दिखाई दे रहा है या टिलरिंग की कमी महसूस हो रही है, तो यूरिया के साथ जिंक सल्फेट (5 किलोग्राम प्रति एकड़) का उपयोग सलाहकार होता है। जिंक सल्फेट फसल के पीलेपन को दूर करता है और गेहूं के टिलर को मज़बूत बनाता है, जिससे मनचाही पैदावार पाना आसान होता है।
इस फर्टिलाइज़र प्रबंधन के दौरान यदि गेहूं की फसल पर काले एफिड्स दिखाई दें, तो आवश्यकतानुसार 1 से 2 बार स्प्रे करने से फसल को स्वस्थ बनाए रखने में मदद मिल सकती है।